Articles by "Father Shayari"

खोकर खुद का वजूद मुझे संभाला हैं,
मुझें इस खूबसूरत सांचे में ढाला हैं!
मेरा किरदार रहा है मेरे पापा जैसा,
कांटो की राहों पर फूलों से पाला हैं!!

~मोHit Iyer

पिताजी के गुज़र जाने के बाद कि हुई मेरी अपनी रचना - मेरी अंतर्मन की पीड़ा

मेरी अंतर्मन की पीड़ा का,
तुम्हें ज़रा भी एहसास नहीं।
बहुत करीब होकर भी,
अब तुम मेरे पास नहीं।।

आपके साथ बिताया हर वक़्त, हर लम्हा,
उन्हें भूल पाना मेरे बस में नहीं।
यादों की उन सुनेहरी जंजीरों में जकड़ा मैं,
अब खुलकर ले पाता हूँ साँस नहीं।।

वो हाथ थामकर स्कूल जाना,
अब स्कूल जाने में वो बात नहीं।
वो आपका चिल्लाना, और मेरा चैन से सोना,
अब ऐसी कोई एक भी रात नहीं।।

#मोhit_Iyer #papa #dedicated

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