Articles by "Dard Bhari Shayari"

अगर चाँद  से गुफ़्तगू करने बैठे,
तो तारे बाते बनाने लगेंगे।

ये जो लोग साथ चल रहे हैं,
यहीं कल हमको समझने लगेंगे।।

जब अंधेरों से जी भर जायेगा मेरा,
तो उजाले भी हमको सताने लगेंगे।

छोड़ दिया हमनें रातों  को सोना!
की ख्वाब भी हमको डराने लगेंगे।

बस एक लम्हे  में हम गुम हो जायेंगे,
फिर हमे ढूँढने में ज़माने लगेंगे।

दिल मे जो खामोशी हैं, वो ज़ख़्म हैं,
ये जो बाहर निकले तो शोर मचाने लगेंगे।

©मोHit_Iyer

पैरो को छू लेती है समंदर की लहेरे,
वो कभी बता के नहीं आती।
दो आंसू गिर जाते है उसकी याद मे,
फिर भी रोने की आवाज नहीं आती।।

~मोHit Iyer

ग़र दर्द हो रहा है, तो फिर उसे पुकार ले।
नए दर्द से अपने पुराने दर्द को संवार ले।।

बना ले नासूर इस क़दर अपने दर्द को 'मोहित'!
की दर्द के मारे सभी तुझसे कुछ दर्द उधार ले।।

~मोhit Iyer

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