Articles by "Real Life Lessons Shayari"

फ़िर वही शाम आंखों के सामने,
तारों से सजी बारात लिये।
इक चांद भी चरखे कि तरह,
बेगाने रथ में जैसे है लगे,
वो धुंधली सी किरणे,
मेरी परछाई के दिखते हैं,
मैं ढूंढ रहा हुुँ खुद को,
इस अंधेरे से रस्ते में,

फ़िर वही शाम आंखों के सामने,
तारों से सजी बारात लिये।
इसके धुएं में मैं डूब गया,
मेरी ख्वाहिशों को मैं भूल गया
मैं खुद को जैसे छोड़ गया,
मेरे अंदर मैं खुद आप नहीं,
तनहा जैसे जा रहा जिये,
फ़िर वही शाम आंखों के सामने,
सपनों की झूठी शान लिये।

...शुभम्

आज दिल मे है, कल नज़र से उतर जायेंगे,
आज जी रहे है, कल दुनियां से निकल जायेंगे।

सच तो बताना जरूरी है, कलम की नोंक से,
यूँ दब कर रहेंगे 'मोहित', तो घुटन से मर जाएंगे।।

✍🏻✍🏻
~मोHit_Iyer

क्या उम्र भर रखूँ उसे, जो रात भर नहीं रहा।

वो सर-ब-सर नहीं रहा,
मेरा जीवन बसर नहीं रहा।

वो भी तो ज़िंदा है अभी,
मैं भी तो मर नहीं रहा।।

सबको तो मरना ही है एक दिन,
कोई भी अमर नहीं रहा।।

ये भी सच है की मैं,
घर छोड़ कर हीं रहा।।

क्या उम्र भर रखूँ उसे,
जो रात भर नहीं रहा।।

~मोHit_Iyer✍🏻

खुलने न दी मंदिर-मस्ज़िद,
बंद पड़ा हैं पाठशाला।
सरकारों को खूब भा रही,
धन बरसाती मधुशाला।।

सोशल-डिस्टनसिंग की रेड़ मर चुकी,
लॉकडाउन को पूरा धो डाला।
शराबियों के व्याकुल हृदय पर,
रस बरसाती मधुशाला।।

नही मिल रहा राशन-पानी,
मगर मिलेगी मधुशाला।
भाड़ में जाये जनता सारी,
क्योंकि दर्द में है पीनेवाला।।

नशा मुक्त हो जाता भारत,
तो कैसे चलती मधुशाला।
कोरोना से मुक्त न होगा कोई,
जब तक खुली रहेगी मधुशाला।।

एक विनती 'मोहित' की भी सुन लो,
ग़र जाए कोई मधुशाला।
वापस न आने दो उसको,
तुम बन्द करो अपने घर का ताला।।

~मोhit

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