Articles by "Guest Post"

यदि प्रेम न होता तो कैसा होता
न मिलतीं समन्दर को पागल सी नदियाँ
और न ही ये चाँद इतना दमकता
न ही ये बादल मटक कर यूँ आते
तय करते मीलों का सफ़र
धरा को प्रेम रस में भिगोने को 
ये हवायें डाकिया न होती 
तकन लाती संग अनगिनत सदायें
यदि प्रेम न होता तो कैसा होता..!!

#अभी

अगर आप सीधे हैं दिल से साफ हैं
आप प्यार देना जानते हैं
तो यकीन मानिए आपकी मोहब्बत
हर कोई पाना चाहेगा पर कोई
इसकी कदर नहीं करेगा
वो आपको अपने पास
रखेगा जरूर पर हमेशा
एक सुरक्षित अंतिम विकल्प 
के तौर पर, आप प्रेम करते
हुए कभी अपने लिए खुशियां
नहीं बटोर सकते हैं..!!

#अभी

मेरी जिंदगी मे तुम्हारा होना एक फेज था
जो गुजर गया और तुम्हारे ये न होने वाला
जो मेरी जिंदगी का फेज है बहुत कठिन है
मतलब कट ही नहीं रहा लेकिन वक्त है
वो दौर भी बीत गया जब तुम साथ थी
तो ये दौर भी बीत जाएगा जब तुम साथ नहीं हो
बाकी और सब बढ़िया तो रहता ही है हमेशा..!!

#अभी

फ़िर वही शाम आंखों के सामने,
तारों से सजी बारात लिये।
इक चांद भी चरखे कि तरह,
बेगाने रथ में जैसे है लगे,
वो धुंधली सी किरणे,
मेरी परछाई के दिखते हैं,
मैं ढूंढ रहा हुुँ खुद को,
इस अंधेरे से रस्ते में,

फ़िर वही शाम आंखों के सामने,
तारों से सजी बारात लिये।
इसके धुएं में मैं डूब गया,
मेरी ख्वाहिशों को मैं भूल गया
मैं खुद को जैसे छोड़ गया,
मेरे अंदर मैं खुद आप नहीं,
तनहा जैसे जा रहा जिये,
फ़िर वही शाम आंखों के सामने,
सपनों की झूठी शान लिये।

...शुभम्

सब हो जाएगा सही, पर आज हो, ये ज़रूरी तो नहीं

सब हो जाएगा सही,
पर आज हो, ये ज़रूरी तो नहीं।


चिड़ियों की वो चहचहाहट,
काले बादलों कि गड़गड़ाहट,
मोर का वो पंख फैलाकर नाचना,
होगा सब फिर से वही,
पर आज हो, ये ज़रूरी तो नहीं।

वो कलियों का खिलना,
भौरों का उनसे मिलना,
रात में जुगनुओं का चमकना,
आकाश में चांद का उगना,
और बहेगी फिर से स्वच्छ नदी,
पर आज हो, ये ज़रूरी तो नहीं।

ये अंधेरा भी दूर हो जाएगा,
इंसान फिर से मुस्काएगा,
आंखों में नई ऊर्जा के साथ,
करेंगे फिर प्रकृति का विकास,
फिर से होगी नई रोशनी,
पर आज हो, ये ज़रूरी तो नहीं।

~शुभम्

अब बहुत हो चुकी अच्छाई,
अब खूबियां मैं अपनी दिखाऊंगा।

फिर लौटूंगा एक नए आदाज़ में,
सब देखेंगे मुझको, एक नया जहान बनाऊंगा।।

~puनीत पाthak

मै करता था प्यार उसको,
लेकिन उसे ये बता ना पाया..

वो अती थी मेरे सामने रोज,
लेकिन यह प्यार जता ना पाया..

वो जाती थी मेरे सामने रोज,
लेकिन उसे कभी सुना ना पाया..

आया एक दिन शादी का कार्ड
मेरे घर पर लेकिन,
ना कहकर ये कार्ड लौटा ना पाया.

हुई शादी उसकी आंखों के सामने मेरे,
पर मै उसका होना चाहता हूं उसे यह बोल न पाया..

अगले सुबह जब उठा मै खुदको संभालते हुए,
तो सामने मेरे दो चिता जल रही थी,
लेकिन मै वो आग को बुझा ना पाया..

~puनीत पाthak

वो दो चिता किसकी?

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