Articles by "Poet's Life Shayari"

हाँ मुझे सम्भलने में थोड़ा वक़्त लगा,
माहौल में ढलने में थोड़ा वक़्त लगा।

कोशिश, अच्छी की उसने जलाने की,
मगर मुझे, जलने में थोड़ा वक़्त लगा।

कागज़ की नाव में सवार मेरी ख्वाहिशें,
नाव को गलने में थोड़ा वक़्त लगा।

ऐसा नहीं था की, इंतजार नहीं किया,
लेकिन मुझे चलने में थोड़ा वक़्त लगा।

बातें अक्सर सीधी करता ही था मैं,
पर लोगो को समझने में थोड़ा वक़्त लगा।

महफ़िल तो अच्छी सजाई थी 'मोहित',
पर माहौल बदलने में थोड़ा वक़्त लगा।

~मोHit

कभी न मिली

मैंने उम्र तो पाई मगर वो जिंदगी कभी न मिली,
शमा तो ख़ूब जलाया मगर रौशनी कभी न मिली।

चाह में जिस नजर की हम रहे उम्र भर तन्हा,
वो नज़र इस नजर से मगर कभी न मिली।।

सिर्फ़ इक घड़ी ही सही जो देती सुकूँ मुझकों,
साँसें थाम-ली मैंने मगर वो घड़ी कभी न मिली।

काम हर इक अधूरा-अधूरा-सा रहने दिया,
इक पल की भी फुरसत मुझे मगर कभी न मिली।।

सबने ख़ूब खेला जज्बात से मेरे जैसे खेल हो कोई,
भीड़ तो दे दी मुझे मगर दोस्ती कभी न मिली।।

औरों को क्या ईल्म मेरी दर्द-ए-दिल तन्हाई का,
क्योंकि मेरी लय और उनकी लय कभी न मिली।

कौन जाने क्या दोष था मेरी फरियाद में 'मोहित',
लाख ढूँढा मैंने ख़ुद मे मगर कमी कभी न मिली।।


#मोHit Iyer

साँसे टूटकर बिखरने लगी हैं

ज़िन्दगी अब अखरने लगी हैं,
साँसे टूटकर बिखरने लगी हैं,
घरों से भीड़ निकलने लगी हैं।

हर तरफ़ मेरे चर्चे हो रहें हैं,
ज़िन्दगी सस्ती मौत पर खर्चे हो रहें हैं।

अरसो बाद मेरी देह को चीर मिला है,
जैसे किसी प्यासे को नीर मिला है।

मेरे करीब कुछ लोग मौन बैठे हैं ,
क्या पता यह सब कौन बैठे हैं।

जिंदगी के पांव में मौत की बेड़ियां पड़ी हैं,
मौत के आगे मसरूफियत हाथ बांधे खड़ी है।

फिर अचानक मेरे जाने की तैयारी हो रही हैं,
मैं आराम से लेटा कंधो की सवारी हो रही हैं।

मेरी देह अपनों के हाथों जलने लगी है।
घरों को भीड़ वापिस निकलने लगी है।

#मोHit Iyer

तज़ुर्बा

कोई आये या जाए, कोई  बात  नही,
तज़ुर्बा है, ये कोई आम बात नही।
फ़कत ग़रीबी से  ही  आता  है  तज़ुर्बा,
गरीबी में रहना किसी के बस की बात नही।।

जहां में हर एक  बन्दा खुदा का है,
मेरे नज़र में तो कोई भी खराब नही।
झुर्रियां पड़ जाती दिन-ओ-रात कमाने में,
हर दुकान में मिले, तजुर्बा कोई शराब नही।।
      
#मोHit_Iyer

अब यूँ फिर कभी मुलाकात न होगी

शायद, अब यूँ फिर कभी मुलाकात न होगी,
सोचा न था कभी कि फिर बात न होगी।

तेरा मुस्कुराना और घबराके दांतों से लबो का दबाना,
याद है मुझे सब लेकिन अब फिर वो रात न होगी।।

माना दुविधा में हो आज,
दोनों की राहें जो जुदा होगी।
पर घबराओ मत जी लूंगा,
पर इस सफ़र में तुम साथ न होगी।।

रिश्ते बनते ही टूट जाने का ग़म मैं जानता हूँ,
किसी की ज़िंदगी मुझ जैसी अकस्मात न होगी ।।

#मोHit_Iyer

हर दर्द जिसका मुझे मंजूर था,
वो शख्स मुझसे कोसों दूर था।

डूब चुका था मैं उसके चाह में,
पर वो तो किसी और के ही नशे में चूर था।।

हर जगह, हर पल इंतज़ार किया उसका,
पर वो तो किसी और के ही बाहों में मसरूफ़ था।

ढूंढा तो सही मैंने उसे हर कोने, हर गली में,
पर वो तो न जाने कौन से शहर था।।

उसकी नफ़रत को भी गले से लगाया मैंने,
की दिल मेरा इस क़दर चाहत में मजबूर था।

रुसवाई की सारी हदें पार कर दी तूने 'मोहित',
पर वो तो किसी और के ही इश्क़ में मशहूर था।।

#मोHit_Iyer

आज दिल मे है, कल नज़र से उतर जायेंगे,
आज जी रहे है, कल दुनियां से निकल जायेंगे।

सच तो बताना जरूरी है, कलम की नोंक से,
यूँ दब कर रहेंगे 'मोहित', तो घुटन से मर जाएंगे।।

✍🏻✍🏻
~मोHit_Iyer

मुझसे नहीं कटती अब
ये उदास रातें!!
बेखुदी मे कल सूरज से कहूँगा,
मुझे साथ लेकर डूबे...

~मोhit

ये फिजाओ में केसा सन्नाटा पसर गया।
इश्क़ का जो भुत था, शायद उतर गया।।

4 दिन साथ रहा वो मेरे भी हमदर्द की तरह।
फिर वो अपने घर गया, मैं अपने घर गया।।

~मोHit Iyer

वक़्त कब ले करवट ये कौन जानता हैं?
खामोशी का पहनकर नक़ाब आये कोई कौन जानता है?
यूँ ही किसी पे भरोसा न किया करो मेरे दोस्त 'मोहित'!
किस-किस के आस्तीन में छुपे हो नाग कौन जानता हैं?


~मोHit Iyer

जो हैं उसको दिखाने की जरूरत क्या हैं?
अपनी पहचान बताने की जरूरत क्या है?
आपका क़िरदार दिखा देगा आपकी शख्सियत!
ढोलक पीटकर हल्ला करने की जरूरत क्या है?

~मोhit

काम अधूरा पड़ा है ख़्वाबों का 
आज फिर नींद ग़ैर-हाज़िर है।

लाज रख ली तेरी यादों ने,
वरना 'मोहित' भी कोई शायर है।।

~मोhit

Tags : 
#poet #poetry #writer #poetrycommunity #poems #writing #writerscommunity #words #wordsofpoet #poetryworld #poets #writers #poetrylovers #poetryisnotdead #writingcommunity #poetsquotes #life #poetryporn #author #feelings #poetslife #poetkadard #dard #emotionshayari #emotions #dil #dilse #dilkadard

ख़ुद से भी खुलकर नही मिलता 'मोहित',
तुम क्या ख़ाक जानते हो हमें।।

बातें तो बड़ी अच्छी करते हो,
बस इतना ही पहचानते हो हमें।।

~मोhit

निगाहें मेरी मुंतज़िर हैं, वो पूछती हैं जुस्तुज़ू क्या हैं,
हक़ीक़त ये हैं कि मुझे भी नही मालूम कि मेरी आरज़ू क्या हैं।

बदलतीं जा रही हैं करवटों पे करवटे दुनिया,
तज़ुर्बे पूछती हैं मुझसे की मेरी आयु क्या हैं।।

~मोhit

दिल दुःखा हैं और दर्द हुआ हैं मुझे भी,
मगर आह! तक नही करते,

जिनके लिए शायरी करते है, वो देखते तो हैं,
मगर वाह! तक नही करते।।

✍✍
~मोhit

सफ़र क्या, क्या मंज़िल की अब कुछ याद नही,
लोग रुख़सत हुए कब कुछ याद नही।

दिल में हर वक़्त होती हैं कुछ चुंबन,
थी मुझे भी किसी की तलब कुछ याद नही।।

वो चाँद थी, या सितारा या कोई फूल,
या एक सूरत थी अज़ब कुछ याद नही।

काश भूल सकते हम भी अतीत अपना,
याद आये भी तो सब कुछ याद नही।।

ये हक़ीक़त हैं की अहबाब को हम,
याद ही कब थे जो हो अब कुछ याद नही।

याद हैं मुझे यू लोगो का 'मोहित' करना,
की मेरा नाम तो दूर, सूरत भी उनको अब कुछ याद नही।।

✍🏻✍🏻
~मोhit

कहें भी तो कहें किसको, की हमारा खो गया क्या?
किसी को क्या की हमको, ये हो गया क्या?

खुली आँखों से अब नज़र आता नही कुछ,
सबसे पूछता फिरता हूँ, कि वो गया क्या?

देखो देखो, राहो की उदासी कुछ कह रही है,
रास्ते मे मुसाफ़िर कही खो गया क्या?

ये शहर इस कदर कब सुनसान था भला,
देखो न मेरा दिल भी कही सो गया क्या?

✍🏻✍🏻
~मोhit

Total Pageviews

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget