Articles by "Heart Touching Shayari"

उन्हें हमारे घर आए कई रोज हो गए,
किस्से सूने और सुनाए कई रोज़ हो गए।

वो रूबरू हुए थे जमाना गुज़र गया,
हमको भी मुस्कुराए कई रोज़ हो गए।।

किस बात की तकरार थी जाने क्या बात थी,
तुमको भी मुह फुलाए कई रोज़ हो गए।

कोई कह दे उनसे कि अब लौट आए,
अब तो हमे सताए कई रोज़ हो गए।।

अब तो बस इन्तज़ार-ए-मौत का है,
अब अश्को को छुपाए कई रोज़ हो गए।

अब इस जहा से जा रहे ह हम,
यू दर्द-ए-दिल दबाए कई रोज़ हो गए।।


#मोHit_Iyer

हाँ, मैंने देखा हैं

हाँ, मैंने देखा हैं.....

दिन को रात होते देखा हैं,
ख़ुद को अनाथ होते देखा हैं।
आगामी वक़्त की फ़िक्र में,
मैंने कल को आज होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

इंसानों को जल कर राख़ होते देखा हैं,
रिश्तों में सबकुछ ख़ाक होते देखा हैं।
थोड़े से ज़िक्र के लिए,
मैंने बच्चों को गुस्ताख़ होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

हरे-भरे बागों को विरान होते देखा हैं,
चलती-फिरती राहों को सुनसान होते देखा हैं।
उस क़यामत से भरे शब-ए-हिज्र में,
मैंने भरी-पूरी बस्ती को श्मशान होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

घर को बदल कर मकान होते देखा हैं,
अपनों को अपने लिए अनजान होते देखा हैं,
उम्रभर रहा मैं तलाश-ए-खिज्र में,
मैंने मद्दतगारो में भी गुमान होते देखा हैं।।
हाँ, मैंने देखा हैं.....

अपनों के फ़रेब से अनबन होते देखा हैं,
ज़िस्म के लिबाज़ को कफ़न होते देखा हैं,
कईयों की इस जन्नत-ए-फ़िक्र में,
मैंने रूह को घुल कर दफ़न होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

अपने ख़्वाबों को मैंने अतीत होते देखा हैं,
ख़ुद में ख़ुद के भय का प्रतीत होते देखा हैं,
हसरत थी 'मोहित' तेरे जिक्र की,
मैंने पल-पल अपने मौत को घटित होते देखा है।।

~मोhit_Iyer

क्या उम्र भर रखूँ उसे, जो रात भर नहीं रहा।

वो सर-ब-सर नहीं रहा,
मेरा जीवन बसर नहीं रहा।

वो भी तो ज़िंदा है अभी,
मैं भी तो मर नहीं रहा।।

सबको तो मरना ही है एक दिन,
कोई भी अमर नहीं रहा।।

ये भी सच है की मैं,
घर छोड़ कर हीं रहा।।

क्या उम्र भर रखूँ उसे,
जो रात भर नहीं रहा।।

~मोHit_Iyer✍🏻

क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।
बुझ गए सारे दियें, अब हो गया अंधेरा,
साथी न दोस्त, अब कोई नही है मेरा,
आख़िर किसके लिए मैं जीता ही रहा हूँ,
क्यों मैं सब-कुछ खोता ही रहा हूँ,
क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।

अब तो हँस रहा है हालत पे मेरे ये सारा ज़माना,
क्या दुःख है मुझें, ये किसी ने कभी न जाना।
ख़ामोश-सा चेहरा लिए फिरता ही रहा हूँ,
क्यों मैं सब-कुछ खोता ही रहा हूँ,
क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।

रास न आये ये तौर-तरीके, ये सर्द-फ़िज़ाये,
मेरे अश्कों को छुपाती ये सावन की घटाएं,
ग़मो को अपने हरदम छुपाता ही रहा हूँ,
क्यों मैं सब-कुछ खोता ही रहा हूँ,
क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।

~मोHit Iyer #review

मुझसे नहीं कटती अब
ये उदास रातें!!
बेखुदी मे कल सूरज से कहूँगा,
मुझे साथ लेकर डूबे...

~मोhit

ये फिजाओ में केसा सन्नाटा पसर गया।
इश्क़ का जो भुत था, शायद उतर गया।।

4 दिन साथ रहा वो मेरे भी हमदर्द की तरह।
फिर वो अपने घर गया, मैं अपने घर गया।।

~मोHit Iyer

Maut Sad Shayari in Hindi
ए ज़िंदगी दर्द थोडे कम दिया कर,
लगता है कभी मौत ही दस्तक दे जाएगी।
या फ़िर सीख कुछ मौत से,
एक दर्द में तुझे मुझसे ही छीन ले जाएगी।।

~मोhit

पिताजी के गुज़र जाने के बाद कि हुई मेरी अपनी रचना - मेरी अंतर्मन की पीड़ा

मेरी अंतर्मन की पीड़ा का,
तुम्हें ज़रा भी एहसास नहीं।
बहुत करीब होकर भी,
अब तुम मेरे पास नहीं।।

आपके साथ बिताया हर वक़्त, हर लम्हा,
उन्हें भूल पाना मेरे बस में नहीं।
यादों की उन सुनेहरी जंजीरों में जकड़ा मैं,
अब खुलकर ले पाता हूँ साँस नहीं।।

वो हाथ थामकर स्कूल जाना,
अब स्कूल जाने में वो बात नहीं।
वो आपका चिल्लाना, और मेरा चैन से सोना,
अब ऐसी कोई एक भी रात नहीं।।

#मोhit_Iyer #papa #dedicated

निगाहें मेरी मुंतज़िर हैं, वो पूछती हैं जुस्तुज़ू क्या हैं,
हक़ीक़त ये हैं कि मुझे भी नही मालूम कि मेरी आरज़ू क्या हैं।

बदलतीं जा रही हैं करवटों पे करवटे दुनिया,
तज़ुर्बे पूछती हैं मुझसे की मेरी आयु क्या हैं।।

~मोhit

दिल दुःखा हैं और दर्द हुआ हैं मुझे भी,
मगर आह! तक नही करते,

जिनके लिए शायरी करते है, वो देखते तो हैं,
मगर वाह! तक नही करते।।

✍✍
~मोhit

कहें भी तो कहें किसको, की हमारा खो गया क्या?
किसी को क्या की हमको, ये हो गया क्या?

खुली आँखों से अब नज़र आता नही कुछ,
सबसे पूछता फिरता हूँ, कि वो गया क्या?

देखो देखो, राहो की उदासी कुछ कह रही है,
रास्ते मे मुसाफ़िर कही खो गया क्या?

ये शहर इस कदर कब सुनसान था भला,
देखो न मेरा दिल भी कही सो गया क्या?

✍🏻✍🏻
~मोhit

हर दिन की तरह वो दिन भी निकल ही जायेगा,
सबको देर ही सही पर मेरी मौत का पैगाम मिल ही जायेगा।

थक जायेंगी धड़कने मेरी भी चलते-चलते,
रूकेंगी साँसे तो शायद मुझे भी आराम मिल ही जायेगा।।

~मोhit
✍🏻✍🏻

ख़बर सुनकर मेरी मौत की, लोग बोलें मत जलाओ इसे शमसान में,

बहुत सी ख़ामियाँ और कुछ ख़ूबियाँ थी इस इंसान में।।

~मोhit
✍🏻✍🏻

मुझपर भी है हज़ारो इल्ज़ाम, मुझसे दूर रहो,
तुम हो जाओगे मेरी ही तरह बदनाम, मुझसे दूर रहो।

तुम ऊगता सूरज, तुम ही तो आने वाला कल हो,
मैं हूँ एक ढलता हुआ शाम, मुझसे दूर रहो।।

सब ही जानते है अभिनेताओं का नाम,
ढूँढ़ो निर्देशक को वहीं हैं गुमनाम, मुझसे दूर रहो।

प्यास बहुत छोटी है तुम्हारी नही सम्भाल पाओगे,
मैं हूँ एक छलकता हुआ जाम, मुझसे दूर रहो।।

~मोhit
✍🏻✍🏻

कहने की कोई ज़रूरत नहीं तुम्हे,
'मोहित' ख़्वामोशियो को बखूबी पढ़ता हैं।

ये इश्क़, मोहब्बत की बाते,
इशारों इशारों में करता हैं।।

~मोhit

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