Articles by "Poet's Pain"

अगर चाँद  से गुफ़्तगू करने बैठे,
तो तारे बाते बनाने लगेंगे।

ये जो लोग साथ चल रहे हैं,
यहीं कल हमको समझने लगेंगे।।

जब अंधेरों से जी भर जायेगा मेरा,
तो उजाले भी हमको सताने लगेंगे।

छोड़ दिया हमनें रातों  को सोना!
की ख्वाब भी हमको डराने लगेंगे।

बस एक लम्हे  में हम गुम हो जायेंगे,
फिर हमे ढूँढने में ज़माने लगेंगे।

दिल मे जो खामोशी हैं, वो ज़ख़्म हैं,
ये जो बाहर निकले तो शोर मचाने लगेंगे।

©मोHit_Iyer

कभी न मिली

मैंने उम्र तो पाई मगर वो जिंदगी कभी न मिली,
शमा तो ख़ूब जलाया मगर रौशनी कभी न मिली।

चाह में जिस नजर की हम रहे उम्र भर तन्हा,
वो नज़र इस नजर से मगर कभी न मिली।।

सिर्फ़ इक घड़ी ही सही जो देती सुकूँ मुझकों,
साँसें थाम-ली मैंने मगर वो घड़ी कभी न मिली।

काम हर इक अधूरा-अधूरा-सा रहने दिया,
इक पल की भी फुरसत मुझे मगर कभी न मिली।।

सबने ख़ूब खेला जज्बात से मेरे जैसे खेल हो कोई,
भीड़ तो दे दी मुझे मगर दोस्ती कभी न मिली।।

औरों को क्या ईल्म मेरी दर्द-ए-दिल तन्हाई का,
क्योंकि मेरी लय और उनकी लय कभी न मिली।

कौन जाने क्या दोष था मेरी फरियाद में 'मोहित',
लाख ढूँढा मैंने ख़ुद मे मगर कमी कभी न मिली।।


#मोHit Iyer

साँसे टूटकर बिखरने लगी हैं

ज़िन्दगी अब अखरने लगी हैं,
साँसे टूटकर बिखरने लगी हैं,
घरों से भीड़ निकलने लगी हैं।

हर तरफ़ मेरे चर्चे हो रहें हैं,
ज़िन्दगी सस्ती मौत पर खर्चे हो रहें हैं।

अरसो बाद मेरी देह को चीर मिला है,
जैसे किसी प्यासे को नीर मिला है।

मेरे करीब कुछ लोग मौन बैठे हैं ,
क्या पता यह सब कौन बैठे हैं।

जिंदगी के पांव में मौत की बेड़ियां पड़ी हैं,
मौत के आगे मसरूफियत हाथ बांधे खड़ी है।

फिर अचानक मेरे जाने की तैयारी हो रही हैं,
मैं आराम से लेटा कंधो की सवारी हो रही हैं।

मेरी देह अपनों के हाथों जलने लगी है।
घरों को भीड़ वापिस निकलने लगी है।

#मोHit Iyer

उन्हें हमारे घर आए कई रोज हो गए,
किस्से सूने और सुनाए कई रोज़ हो गए।

वो रूबरू हुए थे जमाना गुज़र गया,
हमको भी मुस्कुराए कई रोज़ हो गए।।

किस बात की तकरार थी जाने क्या बात थी,
तुमको भी मुह फुलाए कई रोज़ हो गए।

कोई कह दे उनसे कि अब लौट आए,
अब तो हमे सताए कई रोज़ हो गए।।

अब तो बस इन्तज़ार-ए-मौत का है,
अब अश्को को छुपाए कई रोज़ हो गए।

अब इस जहा से जा रहे ह हम,
यू दर्द-ए-दिल दबाए कई रोज़ हो गए।।


#मोHit_Iyer

हाँ, मैंने देखा हैं

हाँ, मैंने देखा हैं.....

दिन को रात होते देखा हैं,
ख़ुद को अनाथ होते देखा हैं।
आगामी वक़्त की फ़िक्र में,
मैंने कल को आज होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

इंसानों को जल कर राख़ होते देखा हैं,
रिश्तों में सबकुछ ख़ाक होते देखा हैं।
थोड़े से ज़िक्र के लिए,
मैंने बच्चों को गुस्ताख़ होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

हरे-भरे बागों को विरान होते देखा हैं,
चलती-फिरती राहों को सुनसान होते देखा हैं।
उस क़यामत से भरे शब-ए-हिज्र में,
मैंने भरी-पूरी बस्ती को श्मशान होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

घर को बदल कर मकान होते देखा हैं,
अपनों को अपने लिए अनजान होते देखा हैं,
उम्रभर रहा मैं तलाश-ए-खिज्र में,
मैंने मद्दतगारो में भी गुमान होते देखा हैं।।
हाँ, मैंने देखा हैं.....

अपनों के फ़रेब से अनबन होते देखा हैं,
ज़िस्म के लिबाज़ को कफ़न होते देखा हैं,
कईयों की इस जन्नत-ए-फ़िक्र में,
मैंने रूह को घुल कर दफ़न होते देखा हैं।।

हाँ, मैंने देखा हैं.....

अपने ख़्वाबों को मैंने अतीत होते देखा हैं,
ख़ुद में ख़ुद के भय का प्रतीत होते देखा हैं,
हसरत थी 'मोहित' तेरे जिक्र की,
मैंने पल-पल अपने मौत को घटित होते देखा है।।

~मोhit_Iyer

मैं अपने ही अंदर धीरे-धीरे मार रहा हूँ

बुझे हुए दिए मैं जला रहा हूँ,
अपने ही ख़्वाबों से ख़ौफ़ खा रहा हूँ।
बादलो ने रोका है रास्ता रोशनी का शायद,
इसीलिए मैं अँधेरों से दोस्ती निभा रहा हूँ।।

प्यास है दो बूंद ही मिल जाये कहीं से,
इसी आस में अपने दिन गुज़ार रहा हूँ।
मयस्सर कहाँ मुझे सुकूँ-ओ-चैन मिले,
मैं ज़िन्दगी से मौत की ओर जा रहा हूँ।।

हौसलों की बुनियाद से महल बना मेरा,
उड़ा न ले आँधियाँ, इसलिए मैं डर रहा हूँ।
मुक़द्दर भी अपना खेल खेल रही है,
मैं अपने ही अंदर धीरे-धीरे मार रहा हूँ।।

#मोHit_Iyer

हर दर्द जिसका मुझे मंजूर था,
वो शख्स मुझसे कोसों दूर था।

डूब चुका था मैं उसके चाह में,
पर वो तो किसी और के ही नशे में चूर था।।

हर जगह, हर पल इंतज़ार किया उसका,
पर वो तो किसी और के ही बाहों में मसरूफ़ था।

ढूंढा तो सही मैंने उसे हर कोने, हर गली में,
पर वो तो न जाने कौन से शहर था।।

उसकी नफ़रत को भी गले से लगाया मैंने,
की दिल मेरा इस क़दर चाहत में मजबूर था।

रुसवाई की सारी हदें पार कर दी तूने 'मोहित',
पर वो तो किसी और के ही इश्क़ में मशहूर था।।

#मोHit_Iyer

आज दिल मे है, कल नज़र से उतर जायेंगे,
आज जी रहे है, कल दुनियां से निकल जायेंगे।

सच तो बताना जरूरी है, कलम की नोंक से,
यूँ दब कर रहेंगे 'मोहित', तो घुटन से मर जाएंगे।।

✍🏻✍🏻
~मोHit_Iyer

क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।
बुझ गए सारे दियें, अब हो गया अंधेरा,
साथी न दोस्त, अब कोई नही है मेरा,
आख़िर किसके लिए मैं जीता ही रहा हूँ,
क्यों मैं सब-कुछ खोता ही रहा हूँ,
क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।

अब तो हँस रहा है हालत पे मेरे ये सारा ज़माना,
क्या दुःख है मुझें, ये किसी ने कभी न जाना।
ख़ामोश-सा चेहरा लिए फिरता ही रहा हूँ,
क्यों मैं सब-कुछ खोता ही रहा हूँ,
क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।

रास न आये ये तौर-तरीके, ये सर्द-फ़िज़ाये,
मेरे अश्कों को छुपाती ये सावन की घटाएं,
ग़मो को अपने हरदम छुपाता ही रहा हूँ,
क्यों मैं सब-कुछ खोता ही रहा हूँ,
क्यों मैं हरपल रोता ही रहा हूँ।।

~मोHit Iyer #review

मुझसे नहीं कटती अब
ये उदास रातें!!
बेखुदी मे कल सूरज से कहूँगा,
मुझे साथ लेकर डूबे...

~मोhit

ये फिजाओ में केसा सन्नाटा पसर गया।
इश्क़ का जो भुत था, शायद उतर गया।।

4 दिन साथ रहा वो मेरे भी हमदर्द की तरह।
फिर वो अपने घर गया, मैं अपने घर गया।।

~मोHit Iyer

Maut Sad Shayari in Hindi
ए ज़िंदगी दर्द थोडे कम दिया कर,
लगता है कभी मौत ही दस्तक दे जाएगी।
या फ़िर सीख कुछ मौत से,
एक दर्द में तुझे मुझसे ही छीन ले जाएगी।।

~मोhit

वक़्त कब ले करवट ये कौन जानता हैं?
खामोशी का पहनकर नक़ाब आये कोई कौन जानता है?
यूँ ही किसी पे भरोसा न किया करो मेरे दोस्त 'मोहित'!
किस-किस के आस्तीन में छुपे हो नाग कौन जानता हैं?


~मोHit Iyer

पैरो को छू लेती है समंदर की लहेरे,
वो कभी बता के नहीं आती।
दो आंसू गिर जाते है उसकी याद मे,
फिर भी रोने की आवाज नहीं आती।।

~मोHit Iyer

ग़र दर्द हो रहा है, तो फिर उसे पुकार ले।
नए दर्द से अपने पुराने दर्द को संवार ले।।

बना ले नासूर इस क़दर अपने दर्द को 'मोहित'!
की दर्द के मारे सभी तुझसे कुछ दर्द उधार ले।।

~मोhit Iyer

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